आइये आज 2 खबरों पर चर्चा करतें हैं, सबसे पहले मैं दोनो ही खबर की पुष्टि नही कर रहा।
पहली खबर है कि 5 वर्ष तक आप संविदाकर्मी रहेंगे आगे आप स्थायी होंगे कि नही ये आपके कार्य पर निर्भर करेगा(ऐसा कहा ज रहा है पर निर्भर करेगा आपके अधिकारी पर) एक तरह से 5 वर्ष तक ट्रायल चलेगा कि आप योग्य हो कि नहीं। हमारे कुछ अति आदर्शवादी साथी कह रहें है कि इससे कर्मचारी मेहनती बनेगा और कामचोर कर्मचारी बाहर हो जाएगा तरस आता है उन आदर्श साथियों पर क्योकि इसके शिकार वो खुद बनने वाले हैं।
आइये जानते है उसकी वास्तविकता- 5 वर्ष संविदा पर रखना और मूल्यांकन के बाद स्थायी किया जाना बहुत ही खतरनाक स्थिति होगी असल मे मूल्यांकन कार्य का होगा ही नहीं उसी की रिपोर्ट अच्छी होगी जो अधिकारी का प्रिय होगा चापलूस होगा, जैसा होता है अभी भी हर ब्लॉक में मिलने वाले शिक्षक सम्मान को देखतें ही है कि किसे मिलता है जो अधिकारी के करीब होता है और जो मेहनत से पढ़ाता है उसे तो कोई जानता ही नहीं।
दूसरी बड़ी समस्या जब स्थायी का समय आएगा तो रिपोर्ट अच्छी करने के नाम पर कितना शोषण होगा सबको पता है, ऐसे ही शोषण के चलते तो साक्षात्कार खत्म करने की मांग हो रही है। मतलब साफ है जो चापलूस होगा जो पैसे देगा वो स्थायी होगा जो ईमानदार होगा, अपने काम से कम रहेगा वो बाहर होगा।
उस व्यवस्था से कर्मचारी कभी ईमानदारी से कार्य नही कर पायेगा वो सही गलत पर नही बल्कि सिर्फ वही करेगा जो उसका अधिकारी चाहता है। जैसा कि निजी क्षेत्र में होता है।सबसे बड़ी कीमत तो महिलाओं को उठानी होगी जैसा कि हर निजी क्षेत्र में होता है।
बाकी आप इसको सही कहने के कई बहाने खोज सकतें हैं।
इसका सबसे बड़ा उदाहरण देता हूँ, नेता जनता के मुद्दों पर चुनाव लड़ता है पर पूरे 5 साल वो जनता के लिए नही पार्टी के हित मे कार्य करता है पार्टी सही करे या गलत आवाज नही उठाता क्योकि उसे पता है कि अगर गलत को गलत बोले तो अगले चुनाव में टिकट कट जाएगा
दूसरी खबर की वास्तविकता खुद चेक कर लीजिए, अगर गलत हो तो दिन भर सरकारी बैंकों को गाली दीजियेगा कुछ चेक पॉइंट बताता हूँ चेक करें-
निजी बैंक में जाये और निम्न बातें चेक करें-
1 आपकी ब्रांच में कितने अकॉउंट है और कितने कर्मचारी
2 कितने जीरो बैलेंस के खाते हैं
3 कौन कौन सी सरकारी योजना का लाभ मिल सकता है
4 कितने कृषि लोन है
5 कितने जनधन खाते है
6 कितने वृद्धा पेंशन के खाते है
7 कितने विधवा पेंशन के खाते हैं
8 कितने सब्सिडी वाले खाते है
9 कितने मुद्रा लोन दिए है
10 कितने एजुकेशन लोन दिए है
11 कितने छोटे लोगो को स्वरोजगार के लिए लोन दिए है
12 कितने छात्रों के खाते हैं
13 कितने किसान निधि के लाभर्तियो के खाते है
14 कितने mdm के बच्चों के खाते है
ऐसे कुछ सवाल है कुछ खुद से जोड़ लें और पूंछे देखिये जवाब मिलता है कि नही और मिलता है तो सरकारी बैंक जाइयेगा वंहा के आंकड़े मिलान कर लीजियेगा। विस्वास मानिए आपको जो भी समस्या हो रही है वो तो रहेगी पर सरकारी बैंकों के प्रति साजिश का पता जरूर चलेगा कि हर दिन एक योजना जोड़ देते है और हर दिन कर्मचारी भी कम कर दे रहें है तो समस्या तो होगी।
उन शिक्षकों पर हंसी आती है जो सरकारी बैंक की कमी बताते है जबकि अभी पिछले महीने सिर्फ अपने अपने स्कूल के बच्चों का mdm को डिटेल बनाने में परेसान हो गए थे जब कि कोई और काम नही था वंही 4 या 6 ब्रांच ने आपके बनाये पूरे ब्लॉक के डेटा को फीड किया वो भी रोज की बैंकिंग को करते हुए।