एक तरफ कोरोना प्रदेश भर में हर दिन नई स्पीड से बढ़ रहा जिसको रोकने की सारी जिम्मेदारी सीधा जनता के कंधों पर डाली जा चुकी है दूसरी तरफ प्रशासन द्वारा लगातार कोरोना को बढ़ने का मौका दिया जा रहा है।
एक तरफ तो आदेश आया कि अगर बाइक पर पीछे पत्नी के अलावा कोई और बैठा तो चालान किया जाएगा ये कोरोना रोकने का प्रयास है या आपदा को अवसर बनाया जा रहा है। अगर घर मे बहन है उसे कंही जाना है तो कैसे जाए माता पिता जी कैसे जाए बाप बेटी कैसे जाए? नियम ऐसे बनाइये जो व्यवहारिक हों।
अब दूसरा पहलू देखिये अभी तक पता नही है कि स्कूल कॉलेज कब खुलेंगे पता नही है जिनके एडमिशन हुए है उनकी पढ़ाई तो बन्द है, जितने B. ED कर चुके है उनके भविष्य का पता नहीं पर नए एडमिशन की इतनी क्या जल्दी थी जो कोरोना के हाहाकार के बीच ही प्रवेश परीक्षा करा दी, लाखो युवा भविष्य बचाने के लिए जीवन ही दांव पर लगा कर परीक्षा देने गए।
जब भी ऐसी परीक्षाएं हुई है रोड जाम हो जाती रही हैं सबको पता था कि सोशल डिस्टेंस मेंटेन कर पाना सम्भव ही नही होगा और वही हुआ सोसल डिस्टनसिंग की धज्जियां उड़ गई।
अगले सप्ताह पुनः ऐसी ही एक बड़ी परीक्षा होने वाली है जिसमे भीड़ होगी और कोरोना ब्लास्ट का खतरा बढ़ेगा।
अब जरा बताइये किसी लड़की को पेपर देना होगा तो पहले वो अपने लिए दुल्हा खोजे तब जाए।
नीचे फ़ोटो देखिये और बताइये क्या इन सभी अभ्यर्थियों का महामारी एक्ट के तहत चालान नही होना चाहिए, अब बस चालान और हो जाये तो कसर पूरी हो जाये।
अगर सब कुछ नार्मल है तो शिक्षकों के ट्रांसफर पर ही काहे कोरोना चिपका हुआ है। अब तो लगता है कि हर वो का हो रहा है जिससे कोरोना फैले, अगर 50,000 लोगो का ट्रांसफर हो जाता तो वो भी एक शहर से दूसरे शहर का सफर न करते तो लाखों लोग सेफ हो जाते।
बाकी हम सबको मौन रहना चाहिए क्योंकि अगर गलत को गलत कह दिया तो सरकार का विरोध हो जाएगा और एक देश प्रेमी को किसी भी दशा में सरकार के विरोध से बचना चाहिए, वैसे भी मरता सिर्फ शरीर है आत्मा अजर अमर है।
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