Thursday, June 18, 2020

भारत और चीन वर्तमान स्थितियां

चीन की करतूत आज से नही बहुत दिनों से उजागर है वो घटिया हरकतों पर उतरा हुआ है और उसके इस रवैये की असली वजह है उसका पैसा है, आप सामान्य जीवन मे भी देखिए जिन लोगो के पास थोड़ा ज्यादा पैसा हो जाता है वो कैसे उलझते रहतें हैं।
   बस चीन का भी दिमाग उसके पैसे ने खराब कर दिया है, अब सवाल ये उठता है कि इसका उपाय क्या है? क्या युद्ध बेहतर रहेगा? क्या युद्ध से सिर्फ चीन का नुकसान होगा हमारा नही? कुत्ते को मारने के लिए क्या आप अपनी औलाद खोएंगे? जो लोग इसका इलाज सिर्फ युद्ध बता रहें है वो भावना में बोल रहे है युद्ध हुआ तो यही लोग पहले चिल्लायेंगे क्योंकि दिक्कत हमें भी उठानी पड़ेगी।
   जरूरी नही है कि हर लड़ाई युद्ध के मैदान में लड़ी जाए दुश्मन को हराने के और भी बेहतर उपाय है जिससे दुश्मन बर्बाद भी हो जाएगा और हमें अतिरिक्त फायदा भी हो जाएगा, चीन की असली ताकत उसका व्यापार, उसकी सस्ती तकनीक है हमें उस पर चोट करनी होगी और ये एक दिन में नहीं होगा समय तो लगेगा पर स्थायी इलाज यही है।

     आज चीन हमारे घर मे घुस चुका है आपको पता भी नही होगा कि कितने प्रोडक्ट आपके पास चीनी है हर दूसरा समान चीनी होगा या फिर कोई न कोई पार्ट चीनी होगा, हद तो यंहा तक है कि हमारे भगवान की मूर्तियां भी चीन बनाता है, डायरेक्ट या इनडाइरेक्ट रूप से बहुत से चीनी सामान इस्तेमाल करतें हैं,हम न चाहते हुए भी चीनी समान पर निर्भर हो गए क्योंकि चीनी समान बहुत सस्ता होता है, जब बात हमारी जेब पर आती है तो हम देशभक्ति भूल अपना बजट संभालते हैं, चीन हमारे घरों में एक दिन में नही पहुंचा है धीरे धीरे पहुंचा है अब इसे भगाया भी एक दिन में नही जा सकता पूरी तैयारी से धीरे धीरे कार्य करना होगा।

   हमारे पास दुनिया मे सबसे ज्यादा कामगार है पर वो कुशल नही है इसलिए बहुत ज्यादा श्रम बर्बाद होता है, सबसे बड़ी कमी हमारी शिक्षा व्यवस्था में है वर्तमान शिक्षा ऐसी है कुछ लाख को तो कुशल बना देती है पर करोड़ो पढ़े लिखे बेरोजगारों की फौज खड़ी कर देती है क्योंकि उन करोड़ो के पास कोई हुनर नही होता इसलिए वो सरकारों का मुह ताकते रहतें है और 18 वर्ष की उम्र से 36 वर्ष तक भटकते हुए बीत जातें है मतलब 18 ऊर्जावान वर्ष बर्बाद हो जातें है।

मेरे अनुसार हमारे देश की शिक्षा व्यवस्था में नैतिक शिक्षा और औद्योगिक शिक्षा को विशेष महत्व दिया जाना चाहिए, शुरुआती शिक्षा से ही कुछ समय हुनर निखारने में जरूर देना चाहिये।

औद्योगिक शिक्षा की सबसे ज्यादा आवस्यकता बेशिक शिक्षा के स्कूलोँ में है क्योंकि इन स्कूलों में उस तबके के बच्चे पढ़ते है जो 90% छात्र आठवीं तक मुश्किल से पढ़ते है और उसके बाद  वो जीवकोपार्जन में लग जातें है और बिना किसी हुनर केउन्हें अच्छी मजदूरी भी नही मिलती, किंतु अगर बेशिक शिक्षा में हुनर निखार पर जोर दे दिया जाए तो जब बच्चे स्कूल से निकलने के बाद बेहतर हुनर के साथ बेहतर पैसा कमाएंगे तो बच्चों और अभिभावकों की सोच स्कूल के लिए बदलेगी जिससे देश की गरीबी भी कम होगी और कुशल कामगार होने पर देश हर चीज का उत्पादन सस्ते में कर सकेगा।

मेरे अनुसार चीन ही नहीं पूरी दुनिया को पछाड़ने का यही बेहतर तरीका है चीन भी कुछ ऐसा ही करता है, भारत मे बिकने वाले ज्यादातर खिलौने और बिजली के समान चीन के स्कूलों में बनते हैं बाद में यही बच्चे निपुड़ हो खुद का कारोबार शुरू करतें है।

देश पर शहीद होने वाले सिपाहियों को हम नमन करतें हैं।

Monday, June 15, 2020

69000 शिक्षक भर्ती उत्तर प्रदेश

69000 भर्ती-

एक ऐसी भर्ती जो मिशाल बनने की ओर अग्रसर है, अगर हो गयी तब भी मिशाल बनेगी जिस दौर में नौकरी जा रही थी उस दौर में योगी जी ने 69000 लोगो को नौकरी दी, और अगर नही हुई तो भी मिशाल बनेगी क्योंकि ये सरकार पर अब तक का सबसे बड़ा प्रश्नचिह्न होगा।

 खैर क्या होगा वो भविष्य बताएगा आइये अन्य मुद्दों को आसान तरीके से समझते हैं-

                सबसे बड़ा ताज्जुब ये है कि वही भर्ती क्यो लफड़े में आती है जिसमे B. ed वाले होते है 68500 हुई इतना हो हल्ला नही हुआ कई बार लगता B.ed वालो का ज्ञान ही इनकी समस्या का कारण बन जाता है इत्ते मुद्दे उखाड़ देतें हैं कि मत पूछो।

वर्तमान में सबसे बड़ा मुद्दा धांधली का चल रहा है, प्रदेश की कोई भी भर्ती नही बचती जिस पर आरोप न लगते हो चाहे 72825 रही हो या 69000 या कोई और सब पर सवाल उठते रहें हैं इससे साफ होता है कि धंधलीबाजो की जड़े बहुत ही गहरी है  जो किसी के भी  शाशनकाल में जीवित रहतीं है सरकार किसी की भी हो ये जुगाड़ निकाल ही लेते हैं क्योकि अब ये व्यवस्था की जड़ तक पहुंच गए हैं। किसी परीक्षा को रद्द करना इसका उपाय नही हो सकता एक रद्द करोगे अगली होगी उसमे भी घुस जाएंगे अगली परीक्षा में धांधली नही होगी ये जिम्मेदारी कौन लेगा, ये कुछ की संख्या कैसे न कैसे रास्ता खोज लेती है इसको रोकने के लिए पूरी व्यवस्था को सुधारना होगा। धांधली हुई कि नही मैं इस पर नही जाना चाहता क्योकि ये जांच का विषय है पर हैरान हूं कि कोई भर्ती बिना आरोप के होगी कि नहीं, कुछ के कारण सब पर सवाल खड़े होते हैं।

अब बात करते है न्यायालय की तो आदेशों की झड़ी देख कर ताज्जुब होता है कि रोज नए आदेश।

Sm के लिए 37000 सीट किस आधार पर रोकी गयी समझ से परे है ये संख्या कंहा से मिली क्या मेरिट कम होने पर इतने sm पास होगें, दूसरी बात sm के अतिरिक्त जो अभ्यर्थी उनकी सीट कंहा है? वो पास होंगे और मेरिट में आये तो उनकी सीट कंहा से आएगी?

   जंहा तक मुझे याद है कि कोर्ट ने कहा था कि आगामी 2 भर्ती में इन्हें शामिल किया जाएगा और इन्हें वेटेज दिया जाएगा, मतलब 2 भर्ती जो भी हो उसके जो भी नियम हो उसमें योग्यता, आयु में छूट मिलेगी बाकी नियम वही रहेंगे तो पिछली परीक्षा का आधार बना कर मेरिट कम करना बिल्कुल गलत होगा अब मेरिट अभ्यर्थी तय करेंगे क्या?

मुझे याद है 72825 भर्ती में कोर्ट ने बच्चों का हित देखते हुए  और योग्यता के लिए 90/105 नियम बनाया और उससे नीचे मेरिट नही करने दी, जबकि अभी भी 6000 से अधिक सीट रिक्त है पर योग्यता के इस नियम के कारण ये सीट नही भरी जा सकी जबकि इस नियम की वजह से 72825 भर्ती में आरक्षण नियम का पालन भी नही हुआ।। कुछ दिन पहले योग्यता के नाम पर जिसकी सीट थी उसे नही मिली तो अब उसी कोर्ट से योग्यता को अनदेखा किया गया तो ये इन 6000 से अधिक लोगो के साथ अन्याय होगा जिनकी सीट भी थी और स्कूलों में शिक्षकों की कमी तब भी कोर्ट ने मेरिट नही गिराई जबकि वे 2011 में जब विज्ञापन निकला तो  उस विज्ञापन के सभी मापदंडों को पूरा कर रहे थे पर 4 साल इंतजार के बाद योग्यता के नाम पर उन्हें बाहर कर दिया गया था।

जब 4 वर्ष पूर्व 90/105 से कम वाले को अयोग्य कर दिया गया था तो आज 60/67 वाला कैसे योग्य हो जाएगा। जबकि 90/105 का आदेश लगा कर सीधा आरक्षित वर्ग की सीट रोक ली गयी थी जो कि संविधान के खिलाफ है क्योंकि इसी न्याय व्यबस्था में कहा गया है कि आरक्षण नियमो का भी पालन भी होना चाहिए पर योग्यता के नाम पर नही हुआ।

मुझे लगता है कि एक ऐसे साथी को इस मुकदमे में जुड़ना चाहिए जो 72825 में 90/105 की वजह से बाहर हुआ हो और अब 60/65 होने पर बाहर हो जाएगा वो बोले कि एक बार योग्य की वजह से बाहर हुआ था आज अयोग्य की वजह से बाहर, आखिर वो क्या है? जो 4 वर्ष पहले 89/104 पा कर अयोग्य हो गया था और आज फिर 60/65 वाले से ज्यादा पा कर अयोग्य हो रहा है। योग्यता का क्या पैमाना है? अगर sm के लिए योग्यता से समझौता किया जा सकता है तो 72825 में भी आरक्षण नियमावली के पालन के लिए 90/105 से समझौता नही हुआ तो अब कैसे होगा एक ही अदालत में योग्यता के 2 नियम?

मेरे अनुसार 60/65 करने की सुनवाई होनी ही नही चाहिए थी जब उससे ज्यादा वाला उपलब्ध  तो फिर बात ही खत्म है और अगर किसी के अधिकारों और नियमो की बात है तो 72825 में जब सरकार ने मेरिट निर्धारित की थी 83/90 जिसे कोर्ट ने योग्यता कर नाम पर 90/105 कर दिया था जो 83/90 वाले आवेदकों के साथ अन्याय था फिर भी सबने योग्यता का सम्मान किया था जबकि बहुतों का हित मारा गया था तो आज भी योग्यता ही देखी जानी चहिये

Tuesday, June 9, 2020

निष्ठुर नियति और बेरोजगारी का दंश

निष्ठुर नियति और बेरोजगारी का दंश

उत्तर प्रदेश में युवाओं के लिए रोजगार पाना निष्ठुर नियति बनकर रह गया है। इतनी बड़ी आबादी के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा भी बढ़ जाना स्वाभाविक है। बेरोजगार युवा पढ़ लिखकर मेहनत करके आगे बढ़ने कुछ बनने का सपना देखता है। इस सपने को धरातल पर मूल रूप देने में अपनी नींद तक का त्याग कर देता है। लेकिन इतनी मेहनत के बाद भी निष्ठुर नियति उनकी राह के कांटे की तरह बनकर आ खड़ी होती है। इसे दुर्भाग्य कहे या व्यवस्था की खामी, हर भर्तियां कॉमेडी शो की तरह बेरोजगारों के साथ मजाक करने में लग जाती है। हर भर्तियां आवेदन, परीक्षा, उत्तरमाला के बाद कोर्ट कचहरी के रास्ते से होकर नियुक्ति तक पहुँचती है। छोटे से लेकर बड़े आयोग कोई भी इससे अछूते नही रहे। वर्तमान में गतिमान 69 शिक्षको की भर्ती भी हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीमकोर्ट की परिक्रमा लगाने के बाद डेढ़ वर्ष पश्चात प्रारम्भ ही हुई कि उसी दिन पुनः हाईकोर्ट ने रोक लगा दी। पिछले सालों में कोई भी भर्ती प्रक्रिया नही रही जिसमे कोई न कोई विवाद न हुआ हो चाहे 72825 शिक्षको की भर्ती हो जिसे पूरे होने में 5 वर्ष लग गए और इस दौरान तीन सरकारे बदल गयी। प्रदेश में हर शिक्षक भर्ती चाहे प्राथमिक हो या माध्यमिक सभी में प्रश्न पत्र से लेकर उत्तरमाला और परिणाम तक विवाद में रहे और ये सभी हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीमकोर्ट तक पहुंचे। इन्ही विवादो की वजह से प्रक्रिया को पूरी होने तीन से चार वर्ष तक लग गए। अभी भी प्रदेश में कई शिक्षको को भर्तियां इन्हीं प्रकार के विवादों की वजह से 3 से 4 वर्ष से लंबित हैं। यही नही इन्ही शिक्षको के स्थानांतरण की भी प्रक्रिया पिछले 6महीने से गतिमान है जोकि अभी तक पूर्ण नही हो सकी है। प्रदेश में सबंधित संस्थाओं को गम्भीरता से सोचना चाहिये , जिससे इस प्रकार के अनुचित अहित से किसी प्रदेशवासी को सामना न करना पड़े।

सुधेश पाण्डेय