इलाहाबाद अकबर का किला
इतिहास
इसका निर्माण वर्ष 1853 में महान मुगल सम्राट अकबर ने करवाया था। प्रारंभ में, किले को इल्हाबास नाम दिया गया था - जिसका अर्थ है भगवान का आशीर्वाद। किले का निर्माण इस तरह से किया गया था कि यह प्रसिद्ध अक्षयवट के पेड़ को घेर सके। लोगों ने यहाँ आत्महत्या कर ली क्योंकि उन्हें विश्वास था कि वे यहाँ मोक्ष प्राप्त करेंगे - ऐसा उनका विश्वास था। प्रसिद्ध पातालपुरी मंदिर भी यहीं है जिसे मूल रूप से नरक के सभी द्वारों का घर कहा जाता है।
इलाहाबाद किला समय: सुबह 9.45 से बजे - शाम 6 बजे
टिकट की कीमत: नि: शुल्क प्रवेश
यात्रा की अवधि: 1-2 घंटे
उपयुक्त समय
अक्टूबर से मार्च तक के सर्दियों के महीने इलाहाबाद किले की यात्रा के लिए सबसे अच्छे हैं। तापमान 4 डिग्री सेल्सियस - 15 डिग्री सेल्सियस के बीच होता है। ग्रीष्मकाल में इलाहाबाद जाने से बचें क्योंकि ग्रीष्मकाल आम तौर पर सूखा होता है और इस दौरान पर्यटन स्थलों का भ्रमण करना आपके लिए थोड़ा मुश्किल हो जाएगा। जुलाई और सितंबर के बीच मानसून के महीनों में भी इलाहाबाद जाया जा सकता है।
आगे के ब्लॉग में आपको प्रयागराज संगम, कुंभ मेला, प्रयागराज के पौराणिक एवं दार्शनिक स्थलों की जानकारी मिलेगी।
सुधेश पाण्डेय



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