अमिताभ बच्चन जिनको कई समस्याएं है सुना है किडनी भी मात्र 23%काम करती है और भी तमाम समस्या है फिर भी वो कोरोना को पराजित किये उनको बहुत बहुत बधाई, आप स्वस्थ रहें दीर्घायु रहें।
बोरिस जॉनसन जैसे तमाम नाम शामिल है जिनका कोरोना कुछ नही बिगाड़ पाया।
क्या इस घटना ने आपको सोचने को मजबूर नही किया की आखिर ये लोग कोरोना से क्यो जीत गए? मैंने सोचा तो मुझे जो समझ मे आया वो ये कि इनके पास बेहतर इलाज, बेहतर सुविधाएं थी इसलिए ये जंग जीत गए, बाकी मारने वालों के आंकड़ों में 10 ऐसे नाम खोजिए जो संम्पन हो और कोरोना से मर गए हो मिलेंगे तो मुझे भी बताएं।
बात साफ है अगर सुविधा होती जो मरें है उनमें से 95% लोगो को बचाया जा सकता था।
आज तमाम लोग निजीकरण का समर्थन करतें है उन्हें थोड़ा ब्रिटिश काल पर नजर डालनी चाहिए क्योकि वो निजीकरण का एक बड़ा उदाहरण है और देखना चाहिए उस काल मे भी विकास हुआ था उनके द्वारा बनाये गए पुल, इमारतें आज भी मजबूती से खड़ी हैं पर कीमत क्या चुकाई है हमने, आप सब बहुत समझदार हैं सोचें।
मुद्दे की बात ये है कि अगर आज सरकारी हॉस्पिटल न होते तो जो बच गए वो भी न बचे होते क्योंकि कोरोना का इलाज का खर्च एक व्यक्ति का 10 लाख से ऊपर आ रहा है आम आदमी खुद ही मर जाना पसंद करता।
आज जनता को आवाज उठानी चाहिए कि शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों में से ही निजी संस्थान बन्द होने चाहिए और सबके लिए एक ही व्यवस्था हो, सब मुफ्त बन्द कर दो पर पहले शिक्षा और स्वास्थ्य का निजीकरण खत्म कर सबके लिए फ्री कर दिया जाए।
देश आपसे ही है आप अच्छा पढ़ेंगे, स्वस्थ रहेंगे तभी तो देश का भला होगा।
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