Monday, June 15, 2020

69000 शिक्षक भर्ती उत्तर प्रदेश

69000 भर्ती-

एक ऐसी भर्ती जो मिशाल बनने की ओर अग्रसर है, अगर हो गयी तब भी मिशाल बनेगी जिस दौर में नौकरी जा रही थी उस दौर में योगी जी ने 69000 लोगो को नौकरी दी, और अगर नही हुई तो भी मिशाल बनेगी क्योंकि ये सरकार पर अब तक का सबसे बड़ा प्रश्नचिह्न होगा।

 खैर क्या होगा वो भविष्य बताएगा आइये अन्य मुद्दों को आसान तरीके से समझते हैं-

                सबसे बड़ा ताज्जुब ये है कि वही भर्ती क्यो लफड़े में आती है जिसमे B. ed वाले होते है 68500 हुई इतना हो हल्ला नही हुआ कई बार लगता B.ed वालो का ज्ञान ही इनकी समस्या का कारण बन जाता है इत्ते मुद्दे उखाड़ देतें हैं कि मत पूछो।

वर्तमान में सबसे बड़ा मुद्दा धांधली का चल रहा है, प्रदेश की कोई भी भर्ती नही बचती जिस पर आरोप न लगते हो चाहे 72825 रही हो या 69000 या कोई और सब पर सवाल उठते रहें हैं इससे साफ होता है कि धंधलीबाजो की जड़े बहुत ही गहरी है  जो किसी के भी  शाशनकाल में जीवित रहतीं है सरकार किसी की भी हो ये जुगाड़ निकाल ही लेते हैं क्योकि अब ये व्यवस्था की जड़ तक पहुंच गए हैं। किसी परीक्षा को रद्द करना इसका उपाय नही हो सकता एक रद्द करोगे अगली होगी उसमे भी घुस जाएंगे अगली परीक्षा में धांधली नही होगी ये जिम्मेदारी कौन लेगा, ये कुछ की संख्या कैसे न कैसे रास्ता खोज लेती है इसको रोकने के लिए पूरी व्यवस्था को सुधारना होगा। धांधली हुई कि नही मैं इस पर नही जाना चाहता क्योकि ये जांच का विषय है पर हैरान हूं कि कोई भर्ती बिना आरोप के होगी कि नहीं, कुछ के कारण सब पर सवाल खड़े होते हैं।

अब बात करते है न्यायालय की तो आदेशों की झड़ी देख कर ताज्जुब होता है कि रोज नए आदेश।

Sm के लिए 37000 सीट किस आधार पर रोकी गयी समझ से परे है ये संख्या कंहा से मिली क्या मेरिट कम होने पर इतने sm पास होगें, दूसरी बात sm के अतिरिक्त जो अभ्यर्थी उनकी सीट कंहा है? वो पास होंगे और मेरिट में आये तो उनकी सीट कंहा से आएगी?

   जंहा तक मुझे याद है कि कोर्ट ने कहा था कि आगामी 2 भर्ती में इन्हें शामिल किया जाएगा और इन्हें वेटेज दिया जाएगा, मतलब 2 भर्ती जो भी हो उसके जो भी नियम हो उसमें योग्यता, आयु में छूट मिलेगी बाकी नियम वही रहेंगे तो पिछली परीक्षा का आधार बना कर मेरिट कम करना बिल्कुल गलत होगा अब मेरिट अभ्यर्थी तय करेंगे क्या?

मुझे याद है 72825 भर्ती में कोर्ट ने बच्चों का हित देखते हुए  और योग्यता के लिए 90/105 नियम बनाया और उससे नीचे मेरिट नही करने दी, जबकि अभी भी 6000 से अधिक सीट रिक्त है पर योग्यता के इस नियम के कारण ये सीट नही भरी जा सकी जबकि इस नियम की वजह से 72825 भर्ती में आरक्षण नियम का पालन भी नही हुआ।। कुछ दिन पहले योग्यता के नाम पर जिसकी सीट थी उसे नही मिली तो अब उसी कोर्ट से योग्यता को अनदेखा किया गया तो ये इन 6000 से अधिक लोगो के साथ अन्याय होगा जिनकी सीट भी थी और स्कूलों में शिक्षकों की कमी तब भी कोर्ट ने मेरिट नही गिराई जबकि वे 2011 में जब विज्ञापन निकला तो  उस विज्ञापन के सभी मापदंडों को पूरा कर रहे थे पर 4 साल इंतजार के बाद योग्यता के नाम पर उन्हें बाहर कर दिया गया था।

जब 4 वर्ष पूर्व 90/105 से कम वाले को अयोग्य कर दिया गया था तो आज 60/67 वाला कैसे योग्य हो जाएगा। जबकि 90/105 का आदेश लगा कर सीधा आरक्षित वर्ग की सीट रोक ली गयी थी जो कि संविधान के खिलाफ है क्योंकि इसी न्याय व्यबस्था में कहा गया है कि आरक्षण नियमो का भी पालन भी होना चाहिए पर योग्यता के नाम पर नही हुआ।

मुझे लगता है कि एक ऐसे साथी को इस मुकदमे में जुड़ना चाहिए जो 72825 में 90/105 की वजह से बाहर हुआ हो और अब 60/65 होने पर बाहर हो जाएगा वो बोले कि एक बार योग्य की वजह से बाहर हुआ था आज अयोग्य की वजह से बाहर, आखिर वो क्या है? जो 4 वर्ष पहले 89/104 पा कर अयोग्य हो गया था और आज फिर 60/65 वाले से ज्यादा पा कर अयोग्य हो रहा है। योग्यता का क्या पैमाना है? अगर sm के लिए योग्यता से समझौता किया जा सकता है तो 72825 में भी आरक्षण नियमावली के पालन के लिए 90/105 से समझौता नही हुआ तो अब कैसे होगा एक ही अदालत में योग्यता के 2 नियम?

मेरे अनुसार 60/65 करने की सुनवाई होनी ही नही चाहिए थी जब उससे ज्यादा वाला उपलब्ध  तो फिर बात ही खत्म है और अगर किसी के अधिकारों और नियमो की बात है तो 72825 में जब सरकार ने मेरिट निर्धारित की थी 83/90 जिसे कोर्ट ने योग्यता कर नाम पर 90/105 कर दिया था जो 83/90 वाले आवेदकों के साथ अन्याय था फिर भी सबने योग्यता का सम्मान किया था जबकि बहुतों का हित मारा गया था तो आज भी योग्यता ही देखी जानी चहिये

No comments:

Post a Comment